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खà¥à¤¦ से बातें करना, उदास रहना, अधिक खाना खाना या खाने की इचà¥à¤›à¤¾ ना होना डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के संकेत हो सकते हैं. वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ में डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤• आम समसà¥â€à¤¯à¤¾ है. घर और ऑफिस की तमाम जिमà¥â€à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को पूरा करने के चकà¥â€à¤•र में वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का शिकार बनता जा रहा है. डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर महिलाà¤à¤‚ उदास और दोषी महसूस करती हैं जबकि पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ में चिड़चिड़े और कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ अधिक बढ़ जाती है. डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर वà¥â€à¤¯à¤µà¤¹à¤¾à¤° में कई तरह के बदलाव महसूस किठजा सकते हैं जिसे समय रहते पहचानना आवशà¥â€à¤¯à¤• है.
हर वकà¥â€à¤¤ उदासी और खालीपन
जो वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¥€à¤¡à¤¼ में à¤à¥€ खà¥à¤¦ को अकेला और उदास महसूस करता है वे नीडिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का शिकार हो सकता है. डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ समाज से कटा-कटा रहता है. हर वकà¥â€à¤¤ विचारों में खोठरहना उसकी आदत बन जाती है.
बेवजह गà¥à¤¸à¥â€à¤¸à¤¾ करना
अधिक गà¥à¤¸à¥â€à¤¸à¤¾ करना डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का सबसे अहम संकेत हो सकता है. डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को हर छोटी-छोटी बात पर गà¥à¤¸à¥â€à¤¸à¤¾ आ सकता है. कई बार तो बिना किसी बात के वà¥â€à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ चीखने और चिलà¥â€à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ à¤à¥€ लग सकता है.
सोने में परेशानी
मसà¥â€à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• के विकास के लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥â€à¤¤ नींद लेना बेहद जरूरी होता है. कà¥â€à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤Ÿà¥€ सà¥â€à¤²à¥€à¤ª न होने के कारण मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥â€à¤• लगातार काम करता रहता है जो आगे चलकर डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ का कारण बन सकता है. जिन लोगों को सोने में परेशानी होती है वे डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ के शिकार हो सकते हैं.
à¤à¥‚ख न लगना या अधिक खाना
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर कई लोगों की à¤à¥‚ख मर जाती है. पसंदीदा खाना सामने होने के बावजूद लोग खाने से इंकार करने लगते हैं. वहीं कà¥à¤› लोग डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होने पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ à¤à¥€ खाने लगते हैं, जिसे इंमोशनल ईटिंग कहा जाता है. à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में गà¥à¤¸à¥â€à¤¸à¤¾ आने के दौरान à¤à¥‚ख अधिक लगने लगती है.
खà¥à¤¦ को चोट पहà¥à¤‚चाना
डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ à¤à¤• मानसिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है जिसके तहत दिमाग में कई तरह के विचार आ सकते हैं. कà¥à¤› लोग दूसरों को चोट पहà¥à¤‚चाने के बारे में सोच सकते हैं तो वहीं कà¥à¤› लोग खà¥à¤¦ को चोट पहà¥à¤‚चाना चाहते हैं. डिपà¥à¤°à¥‡à¤¶à¤¨ होना आज के समय में सामानà¥â€à¤¯ समसà¥â€à¤¯à¤¾ है लेकिन इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ को पहचानकर समय रहते उपचार करवाना आवशà¥â€à¤¯à¤• है.
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